महाभारत 2.69.7
युधिष्ठिर विजानीहि ममेदं भरतर्षभनाधर्मेण जितः कश्चिद्व्यथते वै पराजयात्
yudhiṣṭhira vijānīhi mamedaṃ bharatarṣabhanādharmeṇa jitaḥ kaścidvyathate vai parājayāt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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