महाभारत 2.69.9
संयन्ता सहदेवस्तु धौम्यो ब्रह्मविदुत्तमःधर्मार्थकुशला चैव द्रौपदी धर्मचारिणी
saṃyantā sahadevastu dhaumyo brahmaviduttamaḥdharmārthakuśalā caiva draupadī dharmacāriṇī
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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