महाभारत 2.71.18
एकवस्त्रा तु रुदती मुक्तकेशी रजस्वलाशोणिताक्तार्द्रवसना द्रौपदी वाक्यमब्रवीत्
ekavastrā tu rudatī muktakeśī rajasvalāśoṇitāktārdravasanā draupadī vākyamabravīt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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