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महाभारत 2.71.20
बन्धुशोणितदिग्धाङ्ग्यो मुक्तकेश्यो रजस्वलाःएवं कृतोदका नार्यः प्रवेक्ष्यन्ति गजाह्वयम्
bandhuśoṇitadigdhāṅgyo muktakeśyo rajasvalāḥevaṃ kṛtodakā nāryaḥ pravekṣyanti gajāhvayam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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