महाभारत 2.71.34
अवध्यान्पाण्डवानाहुर्देवपुत्रान्द्विजातयःअहं तु शरणं प्राप्तान्वर्तमानो यथाबलम्
avadhyānpāṇḍavānāhurdevaputrāndvijātayaḥahaṃ tu śaraṇaṃ prāptānvartamāno yathābalam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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