महाभारत 2.71.36
धर्मतः पाण्डुपुत्रा वै वनं गच्छन्ति निर्जिताःते च द्वादश वर्षाणि वने वत्स्यन्ति कौरवाः
dharmataḥ pāṇḍuputrā vai vanaṃ gacchanti nirjitāḥte ca dvādaśa varṣāṇi vane vatsyanti kauravāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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