महाभारत 2.71.38
मया तु भ्रंशितो राज्याद्द्रुपदः सखिविग्रहेपुत्रार्थमयजत्क्रोधाद्वधाय मम भारत
mayā tu bhraṃśito rājyāddrupadaḥ sakhivigraheputrārthamayajatkrodhādvadhāya mama bhārata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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