महाभारत 2.72.13
अयोनिजां रूपवतीं कुले जातां विभावरीम्को नु तां सर्वधर्मज्ञां परिभूय यशस्विनीम्
ayonijāṃ rūpavatīṃ kule jātāṃ vibhāvarīmko nu tāṃ sarvadharmajñāṃ paribhūya yaśasvinīm
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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