महाभारत 2.72.27
अथाब्रवीन्महाप्राज्ञो विदुरः सर्वधर्मवित्एतदन्ताः स्थ भरता यद्वः कृष्णा सभां गता
athābravīnmahāprājño viduraḥ sarvadharmavitetadantāḥ stha bharatā yadvaḥ kṛṣṇā sabhāṃ gatā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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