महाभारत 2.72.28
एषा पाञ्चालराजस्य सुतैषा श्रीरनुत्तमापाञ्चाली पाण्डवानेतान्दैवसृष्टोपसर्पति
eṣā pāñcālarājasya sutaiṣā śrīranuttamāpāñcālī pāṇḍavānetāndaivasṛṣṭopasarpati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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