महाभारत 3.1.2
श्राविताः परुषा वाचः सृजद्भिर्वैरमुत्तमम्किमकुर्वन्त कौरव्या मम पूर्वपितामहाः
śrāvitāḥ paruṣā vācaḥ sṛjadbhirvairamuttamamkimakurvanta kauravyā mama pūrvapitāmahāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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