महाभारत 3.1.39
निवृत्तेषु तु पौरेषु रथानास्थाय पाण्डवाःप्रजग्मुर्जाह्नवीतीरे प्रमाणाख्यं महावटम्
nivṛtteṣu tu paureṣu rathānāsthāya pāṇḍavāḥprajagmurjāhnavītīre pramāṇākhyaṃ mahāvaṭam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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