महाभारत 3.1.5
कथं द्वादश वर्षाणि वने तेषां महात्मनाम्व्यतीयुर्ब्राह्मणश्रेष्ठ शूराणामरिघातिनाम्
kathaṃ dvādaśa varṣāṇi vane teṣāṃ mahātmanāmvyatīyurbrāhmaṇaśreṣṭha śūrāṇāmarighātinām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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