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महाभारत 3.10.1
धृतराष्ट्र उवाच · dhṛtarāṣṭra uvāca
भगवन्नाहमप्येतद्रोचये द्यूतसंस्तवम्मन्ये तद्विधिनाक्रम्य कारितोऽस्मीति वै मुने
bhagavannāhamapyetadrocaye dyūtasaṃstavammanye tadvidhinākramya kārito'smīti vai mune
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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