महाभारत 3.100.8प्रभाते समदृश्यन्त नियताहारकर्शिताःमहीतलस्था मुनयः शरीरैर्गतजीवितैःprabhāte samadṛśyanta niyatāhārakarśitāḥmahītalasthā munayaḥ śarīrairgatajīvitaiḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें