महाभारत 3.101.16
तमसा चावृते लोके मृत्युनाभ्यर्दिताः प्रजाःत्वामेव नाथमासाद्य निर्वृतिं परमां गताः
tamasā cāvṛte loke mṛtyunābhyarditāḥ prajāḥtvāmeva nāthamāsādya nirvṛtiṃ paramāṃ gatāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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