महाभारत 3.103.4
पीयमानं समुद्रं तु दृष्ट्वा देवाः सवासवाःविस्मयं परमं जग्मुः स्तुतिभिश्चाप्यपूजयन्
pīyamānaṃ samudraṃ tu dṛṣṭvā devāḥ savāsavāḥvismayaṃ paramaṃ jagmuḥ stutibhiścāpyapūjayan
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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