महाभारत 3.105.2
षष्टिः पुत्रसहस्राणि तस्याप्रतिमतेजसःरुद्रप्रसादाद्राजर्षेः समजायन्त पार्थिव
ṣaṣṭiḥ putrasahasrāṇi tasyāpratimatejasaḥrudraprasādādrājarṣeḥ samajāyanta pārthiva
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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