महाभारत 3.106.22
स दृष्ट्वा तेजसो राशिं पुराणमृषिसत्तमम्प्रणम्य शिरसा भूमौ कार्यमस्मै न्यवेदयत्
sa dṛṣṭvā tejaso rāśiṃ purāṇamṛṣisattamampraṇamya śirasā bhūmau kāryamasmai nyavedayat
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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