महाभारत 3.106.7
षष्टिस्तानि सहस्राणि पुत्राणाममितौजसाम्कापिलं तेज आसाद्य मत्कृते निधनं गताः
ṣaṣṭistāni sahasrāṇi putrāṇāmamitaujasāmkāpilaṃ teja āsādya matkṛte nidhanaṃ gatāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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