महाभारत 3.108.18
एतत्ते सर्वमाख्यातं गङ्गा त्रिपथगा यथापूरणार्थं समुद्रस्य पृथिवीमवतारिता
etatte sarvamākhyātaṃ gaṅgā tripathagā yathāpūraṇārthaṃ samudrasya pṛthivīmavatāritā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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