महाभारत 3.108.8ततः पपात गगनाद्गङ्गा हिमवतः सुतासमुद्भ्रान्तमहावर्ता मीनग्राहसमाकुलाtataḥ papāta gaganādgaṅgā himavataḥ sutāsamudbhrāntamahāvartā mīnagrāhasamākulāइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें