महाभारत 3.109.2
स पर्वतं समासाद्य हेमकूटमनामयम्अचिन्त्यानद्भुतान्भावान्ददर्श सुबहून्नृपः
sa parvataṃ samāsādya hemakūṭamanāmayamacintyānadbhutānbhāvāndadarśa subahūnnṛpaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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