महाभारत 3.109.5
एवं बहुविधान्भावानद्भुतान्वीक्ष्य पाण्डवःलोमशं पुनरेव स्म पर्यपृच्छत्तदद्भुतम्
evaṃ bahuvidhānbhāvānadbhutānvīkṣya pāṇḍavaḥlomaśaṃ punareva sma paryapṛcchattadadbhutam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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