महाभारत 3.11.17
दस्यूनामिव यद्वृत्तं सभायां कुरुनन्दनतेन न भ्राजसे राजंस्तापसानां समागमे
dasyūnāmiva yadvṛttaṃ sabhāyāṃ kurunandanatena na bhrājase rājaṃstāpasānāṃ samāgame
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें