महाभारत 3.11.29
दुर्योधनः स्मितं कृत्वा चरणेनालिखन्महीम्न किंचिदुक्त्वा दुर्मेधास्तस्थौ किंचिदवाङ्मुखः
duryodhanaḥ smitaṃ kṛtvā caraṇenālikhanmahīmna kiṃciduktvā durmedhāstasthau kiṃcidavāṅmukhaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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