महाभारत 3.110.13
महाह्रदं समासाद्य काश्यपस्तपसि स्थितःदीर्घकालं परिश्रान्त ऋषिर्देवर्षिसंमतः
mahāhradaṃ samāsādya kāśyapastapasi sthitaḥdīrghakālaṃ pariśrānta ṛṣirdevarṣisaṃmataḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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