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महाभारत 3.110.1
लोमश उवाच · lomaśa uvāca
एषा देवनदी पुण्या कौशिकी भरतर्षभविश्वामित्राश्रमो रम्य एष चात्र प्रकाशते
eṣā devanadī puṇyā kauśikī bharatarṣabhaviśvāmitrāśramo ramya eṣa cātra prakāśate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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