महाभारत 3.110.26
स चेदवतरेद्राजन्विषयं ते महातपाःसद्यः प्रवर्षेत्पर्जन्य इति मे नात्र संशयः
sa cedavataredrājanviṣayaṃ te mahātapāḥsadyaḥ pravarṣetparjanya iti me nātra saṃśayaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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