महाभारत 3.110.36ततो रूपेण संपन्ना वयसा च महीपतेस्त्रिय आदाय काश्चित्सा जगाम वनमञ्जसाtato rūpeṇa saṃpannā vayasā ca mahīpatestriya ādāya kāścitsā jagāma vanamañjasāइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें