महाभारत 3.110.7
किमर्थं च भयाच्छक्रस्तस्य बालस्य धीमतःअनावृष्ट्यां प्रवृत्तायां ववर्ष बलवृत्रहा
kimarthaṃ ca bhayācchakrastasya bālasya dhīmataḥanāvṛṣṭyāṃ pravṛttāyāṃ vavarṣa balavṛtrahā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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