महाभारत 3.111.4
ततो निबध्य तां नावमदूरे काश्यपाश्रमात्चारयामास पुरुषैर्विहारं तस्य वै मुनेः
tato nibadhya tāṃ nāvamadūre kāśyapāśramātcārayāmāsa puruṣairvihāraṃ tasya vai muneḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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