महाभारत 3.116.10
ततो ज्येष्ठो जामदग्न्यो रुमण्वान्नाम नामतःआजगाम सुषेणश्च वसुर्विश्वावसुस्तथा
tato jyeṣṭho jāmadagnyo rumaṇvānnāma nāmataḥājagāma suṣeṇaśca vasurviśvāvasustathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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