महाभारत 3.116.23
स मन्युवशमापन्नः कार्तवीर्यमुपाद्रवत्तस्याथ युधि विक्रम्य भार्गवः परवीरहा
sa manyuvaśamāpannaḥ kārtavīryamupādravattasyātha yudhi vikramya bhārgavaḥ paravīrahā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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