महाभारत 3.116.24
चिच्छेद निशितैर्भल्लैर्बाहून्परिघसंनिभान्सहस्रसंमितान्राजन्प्रगृह्य रुचिरं धनुः
ciccheda niśitairbhallairbāhūnparighasaṃnibhānsahasrasaṃmitānrājanpragṛhya ruciraṃ dhanuḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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