महाभारत 3.116.8
व्यभिचारात्तु सा तस्मात्क्लिन्नाम्भसि विचेतनाप्रविवेशाश्रमं त्रस्ता तां वै भर्तान्वबुध्यत
vyabhicārāttu sā tasmātklinnāmbhasi vicetanāpraviveśāśramaṃ trastā tāṃ vai bhartānvabudhyata
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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