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महाभारत 3.119.13
व्यूढोत्तरांसान्पृथुलोहिताक्षा;न्नेमान्स्म पृच्छन्स शृणोति नूनम्प्रस्थापयद्यत्स वनं ह्यशङ्को; युधिष्ठिरं सानुजमात्तशस्त्रम्
vyūḍhottarāṃsānpṛthulohitākṣā;nnemānsma pṛcchansa śṛṇoti nūnamprasthāpayadyatsa vanaṃ hyaśaṅko; yudhiṣṭhiraṃ sānujamāttaśastram
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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