महाभारत 3.119.4ततो गोक्षीरकुन्देन्दुमृणालरजतप्रभःवनमाली हली रामो बभाषे पुष्करेक्षणम्tato gokṣīrakundendumṛṇālarajataprabhaḥvanamālī halī rāmo babhāṣe puṣkarekṣaṇamइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें