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महाभारत 3.12.75
वैशंपायन उवाच · vaiśaṃpāyana uvāca
एवं विनिहतं संख्ये किर्मीरं राक्षसोत्तमम्श्रुत्वा ध्यानपरो राजा निशश्वासार्तवत्तदा
evaṃ vinihataṃ saṃkhye kirmīraṃ rākṣasottamamśrutvā dhyānaparo rājā niśaśvāsārtavattadā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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