Loading
महाभारत 3.120.30
विसृज्य कृष्णं त्वथ धर्मराजो; विदर्भराजोपचितां सुतीर्थाम्सुतेन सोमेन विमिश्रितोदां; ततः पयोष्णीं प्रति स ह्युवास
visṛjya kṛṣṇaṃ tvatha dharmarājo; vidarbharājopacitāṃ sutīrthāmsutena somena vimiśritodāṃ; tataḥ payoṣṇīṃ prati sa hyuvāsa
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें