महाभारत 3.122.2स्थाणुभूतो महातेजा वीरस्थानेन पाण्डवअतिष्ठत्सुबहून्कालानेकदेशे विशां पतेsthāṇubhūto mahātejā vīrasthānena pāṇḍavaatiṣṭhatsubahūnkālānekadeśe viśāṃ pateइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें