महाभारत 3.124.3
ऋषिणा सत्कृतस्तेन सभार्यः पृथिवीपतिःउपोपविष्टः कल्याणीः कथाश्चक्रे महामनाः
ṛṣiṇā satkṛtastena sabhāryaḥ pṛthivīpatiḥupopaviṣṭaḥ kalyāṇīḥ kathāścakre mahāmanāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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