महाभारत 3.124.4
अथैनं भार्गवो राजन्नुवाच परिसान्त्वयन्याजयिष्यामि राजंस्त्वां संभारानुपकल्पय
athainaṃ bhārgavo rājannuvāca parisāntvayanyājayiṣyāmi rājaṃstvāṃ saṃbhārānupakalpaya
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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