महाभारत 3.125.9
तथा मदं विनिक्षिप्य शक्रं संतर्प्य चेन्दुनाअश्विभ्यां सहितान्देवान्याजयित्वा च तं नृपम्
tathā madaṃ vinikṣipya śakraṃ saṃtarpya cendunāaśvibhyāṃ sahitāndevānyājayitvā ca taṃ nṛpam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें