महाभारत 3.127.19
ऋत्विगुवाचयजस्व जन्तुना राजंस्त्वं मया वितते क्रतौततः पुत्रशतं श्रीमद्भविष्यत्यचिरेण ते
ṛtviguvācayajasva jantunā rājaṃstvaṃ mayā vitate kratautataḥ putraśataṃ śrīmadbhaviṣyatyacireṇa te
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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