महाभारत 3.127.20
वपायां हूयमानायां धूममाघ्राय मातरःततस्ताः सुमहावीर्याञ्जनयिष्यन्ति ते सुतान्
vapāyāṃ hūyamānāyāṃ dhūmamāghrāya mātaraḥtatastāḥ sumahāvīryāñjanayiṣyanti te sutān
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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