महाभारत 3.127.21
तस्यामेव तु ते जन्तुर्भविता पुनरात्मजःउत्तरे चास्य सौवर्णं लक्ष्म पार्श्वे भविष्यति
tasyāmeva tu te janturbhavitā punarātmajaḥuttare cāsya sauvarṇaṃ lakṣma pārśve bhaviṣyati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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