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महाभारत 3.128.11
तमब्रवीद्गुरुः सोऽथ पच्यमानोऽग्निना भृशम्त्वं मया याजितो राजंस्तस्येदं कर्मणः फलम्
tamabravīdguruḥ so'tha pacyamāno'gninā bhṛśamtvaṃ mayā yājito rājaṃstasyedaṃ karmaṇaḥ phalam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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