महाभारत 3.13.109
इत्युक्त्वा प्रारुदत्कृष्णा मुखं प्रच्छाद्य पाणिनापद्मकोशप्रकाशेन मृदुना मृदुभाषिणी
ityuktvā prārudatkṛṣṇā mukhaṃ pracchādya pāṇināpadmakośaprakāśena mṛdunā mṛdubhāṣiṇī
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें