महाभारत 3.13.33
आसीनं चित्तमध्ये त्वां दीप्यमानं स्वतेजसाआगम्य ऋषयः सर्वेऽयाचन्ताभयमच्युत
āsīnaṃ cittamadhye tvāṃ dīpyamānaṃ svatejasāāgamya ṛṣayaḥ sarve'yācantābhayamacyuta
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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